Statue Of Equality In Hindi | स्टैचू ऑफ इक्वलिटी

Statue Of Equality In Hindi | स्टैचू ऑफ इक्वलिटी

Statue Of Equality In Hindi | स्टैचू ऑफ इक्वलिटी

स्टैचू ऑफ इक्वलिटी | Statue Of Equality

दोस्तों आप लोगों को पता होगा कि स्टैचू ऑफ यूनिटी गुजरात में आपको देखने को मिलेगा। वहीं दूसरी ओर स्टैचू ऑफ इक्वलिटी आपको तेलंगाना में देखने को मिलता है। हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसका इनॉग्रेशन किया है और हमारे पास स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ-साथ स्टैचू ऑफ इक्वलिटी भी है। यह भक्ति मूवमेंट से जुड़ी हुई है।

कहां है स्टैचू ऑफ इक्वलिटी

यह भारत के तेलंगाना के अंदर हैदराबाद में आपको देखने को मिलेगी जिसकी आबादी 35000000 है। स्टेचू ऑफ इक्वलिटी दुनिया में अब सेकंड हाईएस्ट स्टैचू बन गई है और स्टैचू ऑफ इक्वलिटी दुनिया की हाईएस्ट सेटिंग स्टैचू है। स्टैचू ऑफ इक्वलिटी की हाइट 216 फीट है।

स्टैचू ऑफ इक्वलिटी का दूसरा नाम रामानुज स्टैचू भी कहा जाता है यह स्टेचू 11th सेंचुरी के भक्ति मूवमेंट से रामानुज जी को रिलेट करता है।  रामानुज जी ने 11th सेंचुरी के आसपास भक्ति मूवमेंट को काफी आगे बढ़ाया था।

क्या है भक्ति मूवमेंट

भक्ति मूवमेंट से हर दूसरे व्यक्ति को बताया जाता है कि आदमी किसी भी कलर, सेक्स, क्रीड, अन्य जातीय प्रजाति हो उसे भी एक जैसा व्यवहार करेंगे। भक्ति मूवमेंट उस समय का काफी ज्यादा अद्भुत और रिवॉल्यूशनरी आन्दोलन था।

स्टैचू ऑफ इक्वलिटी किससे बना है

स्टैचू ऑफ इक्वलिटी पंचलोहा से बना है पंचधातु (फाइव मेटल) का कॉन्बिनेशन है। पंचधातु में गोल्ड, सिल्वर, कॉपर, ब्रास और जिंक आते हैं।

स्टेचू ऑफ इक्वलिटी कॉस्ट

स्टेट ऑफ इक्वलिटी पंचधातु से बनी हुई है और पंचधातु की कीमत काफी ज्यादा मानी जाती है। क्योंकि इसमें गोल्ड और सिल्वर आते हैं साथ ही साथ इसमें अन्य मेटल भी आती है। जिससे इसकी कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा की बताई जा रही है।

स्टेचू ऑफ इक्वलिटी का कॉस्ट 1000 करोड़ होने के साथ-साथ यह भी जानना आवश्यक है जो इसकी कॉस्ट है वह सारे डोनेशन से आई है और जो इनके मानने वाले हैं उन्होंने स्टैचू आफ इक्वलिटी को बनने में अपना सहयोग प्रदान किया है। कई देश और विदेश के भक्तों ने इस को बनाने में अपना सहयोग और योगदान दिया है। जो कि इनकी विचारों से बहुत ही ज्यादा प्रभावित है और अपने आप को प्रेरित करते हैं।

कौन है रामानुजाचार्य

रामानुजाचार्य का जन्म 1017 श्रीपेरंबदूर तमिल नाडु में हुआ था रामानुजाचार्य एक  वैदिक फिलॉस्फर और सोशल रिफॉर्मर थे। जिन्होंने पूरे भारत में घूम घूम कर भक्ति आंदोलन का प्रचार किया और हर व्यक्ति को इक्वलिटी और सोशल जस्टिस के बारे में बताया।

रामानुजाचार्य ने भक्ति मूवमेंट को फिर से रिवाइज किया और भक्ति स्कूल ऑफ थॉट्स को इंस्पायर करने के साथ-साथ इसके काफी ज्यादा इंस्पिरेशन को भी बढ़ाया।

रामानुजाचार्य के प्रमुख भक्तों में कबीर, भक्त रामदास, मीराबाई, त्याग राज,अन्नामाचार्य कई सारे अन्य भक्त हैं। जिनकी भी काफी ज्यादा लोगों में प्रचलन और काफी ज्यादा इन भक्तों को भी लोग मानते हैं।

वसुदेव कुटुंबकम का विचार  भी रामानुजाचार्य ने ही दिया था। जिसे पूरा भारत और हमारे देश के प्रधानमंत्री भी पूरे विश्व भर में में फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसे Statue Of Equality क्यों कहा जाता है?

रामानुज सदियों पहले लोगों के सभी वर्गों के बीच सामाजिक समानता के पैरोकार थे।  उन्होंने मंदिरों को समाज में जाति या स्थिति के बावजूद सभी के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए प्रोत्साहित किया। ऐसे समय में जब कई जातियों के लोगों को उनमें प्रवेश करने से मना किया गया था। उन्होंने शिक्षा को उन लोगों तक पहुंचाया जो इससे वंचित थे। उनका सबसे बड़ा योगदान “वसुधैव कुटुम्बकम” की अवधारणा का प्रचार है, जिसका अनुवाद “सारा ब्रह्मांड एक परिवार है” के रूप में होता है।

उन्होंने मंदिर के मंचों से सामाजिक समानता और सार्वभौमिक भाईचारे के अपने विचारों का प्रचार करते हुए कई दशकों तक पूरे भारत की यात्रा की।
उन्होंने सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े लोगों को गले लगाया और शाही अदालतों से उनके साथ समान व्यवहार करने को कहा। उन्होंने ईश्वर की भक्ति, करुणा, विनम्रता, समानता और आपसी सम्मान के माध्यम से सार्वभौमिक मोक्ष की बात की, जिसे श्री वैष्णव संप्रदाय के रूप में जाना जाता है।

रामानुजाचार्य ने सामाजिक, सांस्कृतिक, लिंग, शैक्षिक और आर्थिक भेदभाव से लाखों लोगों को इस मूलभूत विश्वास के साथ मुक्त किया कि राष्ट्रीयता, लिंग, जाति, जाति या पंथ की परवाह किए बिना हर इंसान समान है।

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