पूरी जगन्नाथ मंदिर का इतिहास

पूरी जगन्नाथ मंदिर का इतिहास- Puri Jagannath Temple History in Hindi

पूरी जगन्नाथ मंदिर का इतिहास : In this article, we are providing information about Jagannath Temple in Hindi- lord | Puri Jagannath Temple History in Hindi Language. हिस्ट्री ऑफ जगन्नाथ टेम्पल | पूरी जगन्नाथ मंदिर का इतिहास और तथ्य

पूरी जगन्नाथ मंदिर का इतिहास- Jagannath Temple History in Hindi

जगन्नाथ मन्दिर भारत के औडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। यह हिंदुओ का प्रमुख मंदिर है और पवित्र चार धाम में से एक है। यह जगन्नाथ भगवान यानि की श्रीकृष्ण का मंदिर है। यहाँ हर साल रथ यात्रा निकाली जाती है। इस मंदिर में तीन प्रमुख देवता है श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलदेव और उनकी बहन सुभद्रा।

Puri Jagannath Temple History in Hindi

Jagannath Temple Puri History in Hindi जगन्नाथ मंदिर को बनवाने का कार्य कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने शुरू करवाया था। इस मंदिर का जगमोहन और विमान भाग उनके शासनकाल 1078-1148 में हुआ था। 1197 में औडिसा के शासक अनंग भीम देव ने इसका निर्माण करवा इसे वर्तमान रूप दिया था। कहा जाता है कि राजा इन्द्रद्युम्न की विनती पर विष्णु भगवान और विश्वकर्मा कारीगर और मुर्तिकार के रूप में आए थे और मुर्ति का निर्माण किया था लेकिन मुर्तियाँ अपूर्ण रह गई थी, उनके हाथ नहीं बने थे। सुभद्रा, श्रीकृष्ण और बलभद्र की इन्हीं मुर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया था। 1558 तक मंदिर में पूजा अर्चना हुआ करती थी लेकिन काला पहाड़ ने औड़िसा पर हमला कर मंदिर और मूर्तियों को खंडित कर दिया था। विग्रहों को चिलिका झील में एक द्वीप में रखा गया था। बाद में जब रामचंद्र देव ने खुर्दा में स्वतंत्रत राज्य की स्थापना की तब मंदिर में मुर्तियों की दोबारा स्थापना हुई।

यह भी कहा जाता है कि यहाँ पहले गौतम बुद्ध का स्तूप हुआ करता था जिसमें उनका दाँत रखा गया था जिसे बाद में श्रीलंका जो कि उसका वर्तमान स्थान है वहाँ पहुँचा दिया गया था। बाद में यहाँ पर वैष्णव समुदाय ने अदिपत्य स्थापित कर मंदिर का निर्माण करवाया था। महाराणा रणजीत सिंह ने इस मंदिर के लिए बहुत ही ज्यादा सोना दान दिया था।

पूरी जगन्नाथ मंदिर की वस्तु कला | Architecture Information about Puri Jagannath Temple in Hindi

जगन्नाथ मंदिर कलिंग वास्तु शैली में बना हुआ एक अद्भुत मंदिर है जिसका वृहत 400,000 वर्ग फूट में फैला हुआ है। मुख्य मंदिर को वक्ररेखीय आकार का बनाया गया है जिसके शिखर पर सुदर्शन चक्कर बना हुआ है। इस चक्र को बहुत ही पवित्र माना जाता है जो कि अष्ट धातुओं से बना है। इसे नीलचक्र भी कहा जाता है। मंदिर का मुख्य ढाँचा 65 मीटर ऊँचे पाषाण के चुबुतरे पर बना है जिसके भीतर गर्भगृह में श्री कृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा की मुर्तियाँ है। यह पर्वत को घेरे हुए छोटी पहाड़ियों और उनको घेरे टिले के रूप में बना हुआ है।

मुख्य भवन को एक 20 फीट ऊँची दीवार घेरे हुए है और दुसरी दीवार मुख्य मंदिर को घेरती है। मुख्य द्वार दो सिंह के द्वारा सुरक्षित किए जाते हैं और उसके ठीक सामने एक सोलह किनारों वाला एकाश्म स्तंभ है। जगन्नाथ मंदिर में एक बहुत बड़ी रसोई भी है जहाँ पर भगवान को चढ़ाने के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। यह रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई है।

जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कुछ तथ्य | Puri Jagannath Temple Information and Facts in Hindi 

  1. जगन्नाथ मंदिर की चोटी पर जो ध्वजा है उसे कोई न कोई पुजारी 215 फीट की ऊँचाई पर चढ़ कर रोज ध्वजा को बदलता है।
  2. मंदिर की चोटी पर लगी हुई ध्वजा पवन की दिशा से दुसरी तरफ उड़ती है।
  3. मंदिर के गुबंद को इस तरह से बनाया गया है कि उसकी परछाई पूरे दिन में एक बार भी जमीन पर नहीं दिखाई देती है।
  4. मंदिर के उपर आज तक किसी भी पक्षी या हवाई जहाज को उड़ते हुए नहीं देखा गया है।

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