पर्यावरण क्या है?

पर्यावरण क्या है? अर्थ परिभाषा और प्रकार

पर्यावरण क्या है? – पर्यावरण का अर्थ पर्यावरण शब्द परि + आवरण से मिलकर बना है परि का अर्थ है चारों ओर और आवरण का अर्थ है घिरा हुआ। अर्थात पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ – चारों ओर से घिरा हुआ। पर्यावरण वह है जो कि प्रत्येक जीव के साथ जुड़ा हुआ है हमारे चारों और वह हमेशा व्याप्त होता है। जैसे नदी ,पहाड़, तालाब, मैदान, पेड़-पौधे, जीव-जंतु वायु वन मिट्टी आदि सभी हमारे पर्यावरण के घटक है।

पर्यावरण क्या है? अर्थ परिभाषा और प्रकार

हम सभी इन घटको का दैनिक जीवन में भरपूर उपयोग करते है अर्थात हम इन घटको पर ही निर्भर है। पर्यावरण में बहुत सारी सजीव और निर्जीव वस्तुएँ पाते हैं। ये सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं।

पर्यावरण की परिभाषा –

पर्यावरण की परिभाषा इस प्रकार है –

  • निकोलर्स के अनुसार- “ पर्यावरण उन समस्त बाहरी दशाओं तथा प्रभावों का योग है जो प्रत्येक प्राणी के जीवन विकास पर प्रभाव डालते है “
  • सी.सी. पार्क के अनुसार- “ मनुष्य एक विशेष समय पर जिस सम्पूर्ण परिस्थितियों से धिरा हुआ है उसे पर्यावरण या वातावरण कहा जाता है। “
  • जे.एस. रॉस के अनुसार- “ पर्यावरण या वातावरण वह वाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती हैं।”
  • शिक्षाशास्त्री टॉमसन के अनुसार- “ पर्यावरण ही शिक्षक है शिक्षा का काम छात्र को उसके अनुकूल बनाना हैं।”
  • विश्व शब्दकोश के अनुसार- “ पर्यावरण उन सभी दशाओं, प्रणालियों तथा प्रभावों का योग है जो जीवों व उनकी प्रजातियों के विकास जीवन एंव मृत्यु को प्रभावित करता हैं।”
  • हर्स, कोकवट्स के अनुसार- “ पर्यावरण इन सभी बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है तो प्राणी के जीवन तथा विकास पर प्रभाव डालता है।”
  • डॉ डेविज के अनुसार- “ मनुष्य के सम्बन्ध में पर्यावरण से अभिप्राय भूतल पर मानव के चारों ओर फैले उन सभी भौतिक स्वरूपों से है। जिसके वह निरन्तर प्रभावित होते रहते हैं।”
  • बुडबर्थ के अनुसार- “पर्यावरण शब्द का अभिप्राय उन सभी बाहरी शक्तियों और तत्वों से है, जो व्यक्ति को आजीवन प्रभावित करते हैं।”
  • डडले स्टेम्प के अनुसार- “ पर्यावरण प्रभावों का ऐसा योग है जो किसी जीव के विकास एंव प्रकृति को परिस्थितियों के सम्पूर्ण तथ्य आपसी सामंजस्य से वातावरण बनाते हैं।”
  • ए.बी.सक्सेना के अनुसार- “ पर्यावरण शिक्षा वह प्रक्रिया है जो पर्यावरण के बार में हमें संचेतना, ज्ञान और समझ देती है । इसके बारे में अनुकूल दृष्टिकोण का विकास करती है और इसके संरक्षण तथा सुधार की दिशा में हमे प्रतिबद्ध करती हैं।”
  • हर्सकोविट्स के अनुसार- “पर्यावरण उन समस्त बाह्य दशाओं एवं प्रभावों का योग है जो प्राणी के जीवन एवं विकास पर प्रभाव डालते हैं।”
  • जर्मन वैज्ञानिक फिटिगं के अनुसार “ पर्यावरण जीवों के परिवृत्तिय कारकों का योग है । इसमें जीवन की परिस्थितियों के सम्पूर्ण तथ्य आपसी सामंजस्य से वातावरण बनाते हैं।”
  • डगलस एवं रोमन हालैण्ड के अनुसार- “पर्यावरण उन सभी बाहरी शक्तियों एवं प्रभावों का वर्णन करता है, जो प्राणी जगत के जीवन, स्वभाव, व्यवहार, विकास और परिपक्वता को प्रभावित करता है।”
  • एनास्टैसी के अनुसार- “पर्यावरण प्रत्येक वह वस्तु है जो जीन्स (Genes) के अतिरिक्त व्यक्ति को प्रभावित करती है।”
  • अर्नेस्ट हैकेल के अनुसार- “पय्यावरण का तात्पर्य मनुष्य के चारों ओर पायी जाने वाली परिस्थितियों के उस समूह से है जो उसके जीवन और उसकी क्रियाओं पर प्रभाव डालती है।”
  • बोरिंग के अनुसार- “एक व्यक्ति के पर्यावरण में वह सब कुछ सम्मिलित किया जाता है जो उसके जन्म से मृत्युपर्यन्त उसे प्रभावित करता है।”

पर्यावरण के प्रकार –

पर्यावरण को हम दो भागों में बांट सकते है –

  1. भौतिक पर्यावरण –भौतिक पर्यावरण वह है जो हमारे चारो ओरमौजूद है। जिसे हम अपने हांथो से छू सकते है। इसके अंतर्गत वायु, जल व खाद्य पदार्थ भूमि, ध्वनि, उष्मा प्रकाश, नदी, पर्वत, खनिज पदार्थ, विकिरण आदि पदार्थ शामिल हैं।
  2. अभौतिक पर्यावरण –अभौतिक पर्यावरण हमारे चारों ओर मौजूद तो है है लेकिन यह हमें दिखाई नही देता। जिसका हम सिर्फ आभास कर सकते है। इसमें रीति रिवाज, धर्म, आस्था, विस्वास इत्यादि शामिल है।

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