माता मनसा देवी मंदिर पंचकूला | Mata Mansa Devi Mandir Panchkula

माता मनसा देवी मंदिर पंचकूला

पंचकूला में माता मनसा देवी मंदिर हिंदुओं के बीच एक वांछित तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मनसा देवी अथवा शक्ति को समर्पित है। 100 एकड़ से अधिक भूमि में हुआ यह मंदिर शिवालिक पहाडि़यों की तलहटी में स्थित है। नवरात्रों में लगने वाले मेले में देशभर से भक्त इस मंदिर में आते हैं। कहा जाता है कि जिस स्थान पर आज माता मनसा देवी का मंदिर है, यहां सती माता के सिर का अगला हिस्सा गिरा था।

यह मंदिर 1811-1815 के दौरान महाराज गोला सिंह के द्वारा बनवाया गया

यह मंदिर 1811-1815 के दौरान महाराज गोला सिंह के द्वारा बनवाया गया था। यह हिमालयी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। हिमालय को शिव और शक्ति का निवास स्थान माना जाता है। इस मंदिर के अलावा पंचकूला में अनेक अन्य मंदिर हैं जहाँ शक्ति की पूजा की जाती है। इस क्षेत्र से पुरातात्विक खंडहर मिले हैं जो पुराने समय में यहाँ के लोगों की पारंपरिक संस्कृति पर केंद्रित हैं।

महाराजा पटियाला करम सिंह द्वारा दूसरा मंदिर बनवाया गया

मुख्य मंदिर से 200 मीटर की दूरी पर 1840 में तत्कालीन महाराजा पटियाला करम सिंह द्वारा मंदिर बनवाया गया था।  इस मंदिर को मनीमाजरा राज्य का संरक्षण प्राप्त था। रियासतों के पेप्सू में विलय के बाद राज्य सरकार का संरक्षण समाप्त हो गया और ये  मंदिर उपेक्षित रहे। मनीमाजरा के राजा ने तब पुजारी को इस मंदिर का ‘खिदमतुजर’ नियुक्त किया, जिसका कार्य मंदिर के देवता की पूजा करना था।

श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड का गठन

रियासत के पेप्सू में विलय के बाद ये पुजारी मंदिर के मामलों और मंदिर से जुड़ी भूमि के नियंत्रण और प्रबंधन के मामले में स्वतंत्र हो गए। वे न तो इस मंदिर का रखरखाव कर सकते थे और न ही आने वाले भक्तों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर सकते थे। इस तरह मंदिर की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती गईबाद में हरियाणा सरकार ने इसे अपने नियंत्रण में लेकर यात्रियों के लिए अच्छी व्यवस्था करने के लिए श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड का गठन किया है  

शक्तिवाद एक पंथ है जो भारत के इस भाग में बहुत प्रचलित है। अपने नाम के अनुरूप वरदान देने वाली देवी के रूप में मनसा देवी भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इस मंदिर में नवरात्रि पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह नौ दिनों तक चलता है जब भक्त अपनी प्रार्थना करने के लिए यहाँ आते हैं। हरियाणा पर्यटन द्वारा जटायू यात्री निवास की व्यवस्था की गई है।

शारदीय नवरात्रि मेला आश्वन और चैत्र महीनों में लगता है

शारदीय नवरात्रि मेला आश्वन और चैत्र महीनों में लगता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर के ट्रस्ट के द्वारा आवास और दर्शन की उचित व्यवस्था की जाती है। तम्बू के आवास, दरी, कंबल, अस्थायी शौचालय, अस्थायी डिस्पेंसरी, मेला पुलिस चौंकी और लाइनें साल के इस समय उपलब्ध होने वाली कुछ संविधाएं हैं। भक्तों के आने-जाने की व्यवस्था के लिए सख़्त कदम उठाए जाते हैं। इसके पुरातात्विक और पौराणिक महत्व के कारण तथा अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए आने वाले भक्तों के लिए हरियाणा सरकार ने इस मंदिर के बुनियादी ढांचे, प्रबंधन और प्रशासन में सुधार के लिए प्रयास किए हैं। आसपास की भूमि और इमारतों की देखरेख भी की जाती है।

माता मनसा देवी मंदिर विरासत स्थल के रूप में संरक्षित है

यह जगह विरासत स्थल के रूप में संरक्षित है। मंदिर की दीवारों को भित्तिचित्रों के 38 पैनलों से सजाया गया है। मेहराब और छत फूलों क चित्रों से सजी हुई हैं। हालांकि, ये बहुत कलात्मक नहीं हैं लेकिन फिर भी विभिन्न विषयों को दर्शाती हैं। मुख्य मंदिर की वास्तुकला गुंबदों और मीनारों के साथ मुग़ल वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करती है।

माता मनसा देवी मंदिर पंचकूला कैसे पहुंचे 

यह मंदिर चंडीगढ़ से 10 कि.मी. और पंचकूला से 4 कि.मी. दूर है। स्थानीय बसें और आटो रिक्शा परिवहन के साधन के रूप में आसानी से उपलब्ध होती हैं। नवरात्रि के दौरान विशेष बसें चलाई जाती हैं। हवाईमार्ग तथा रेलमार्ग से आने पर चंडीगढ़ गंतव्य स्थान है।

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