ग्वालियर किले का इतिहास और तथ्य

ग्वालियर किले का इतिहास और तथ्य- Gwalior fort History in Hindi

ग्वालियर किले का इतिहास और तथ्य : In this article, we are providing information about Gwalior fort in Hindi- Gwalior fort History in Hindi Language. हिस्ट्री ऑफ ग्वालियर फोर्ट | ग्वालियर किले का इतिहास और तथ्य

 ग्वालियर किले का इतिहास और तथ्य

ग्वालियर का किला बहुत ही प्रसिद्ध है और यह भीरत के मध्य प्रदेश राज्य के ग्वालियर शहर में स्थित है। यह गोपांचल नामक पर्वत पर बना हुआ है और सुरक्षित बनावट के साथ दो भागों में बँटा हुआ है। इस समय यह एक पुरातत्व संग्रहालय के रूप में हैं।

Gwalior fort History in Hindi

Gwalior kila ka itihas इतिहास में बहुत से राजाओं ने इस किले पर शासन किया है। इस किले के सबसे पहले राजा सूरज सेन पाल थे जिन्होंने 8वीं शताब्दी में किलो को बनवाया था। उनके 83 उतराधिकारियों ने किले पर राज किया था लेकिन 84वें उतराधिकारी के शासन काल में यह किले को हार गए थे। 10वीं शताब्दी में किले का नियंत्रण चंदेल वंश के दीवान कच्छापघ्त के पास था और 11वीं सदी में मुगल शासकों ने किले पर हमला करना शुरू कर दिया था। मुहम्मद गजनवी ने भी किले पर 4 दिन के लिए कब्जा कर लिया था और बाद में 35 हाथियों के बदले में उसने किले से कब्जा हटा लिया था। काफी समय तक लंबी लड़ाई के बाद कुतुब अल दिन ऐबक ने किले पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया था जिसे बाद में वह हार गया था। उसके बाद 1232 में इल्तुतमिश ने किले पर राज किया। 1398 में किले का निर्माण तोमर वंश के राजा तोमर सिंह मान ने करवाया था।

1505 में सिकंदर सिंह लोधी जो कि दिल्ली के सुल्तान थे उन्होंने किले पर कब्जा किया पर वह सफल नहीं हो पाए। उसके बाद सिंकदर के बेटे इब्राहिम लोधी ने किले पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी। 10 साल बाद मुगल बादशाह बाबर ने किले पर कब्जा किया जिसे 1542 में वह शेर शाह सुरी से हार गया। अकबर ने 1558 में दोबारा किले को जीत कर उसे कारागार में तबदील कर दिया था।

ओरंगजेब की मृत्यु के बाद इस किले पर गोहद के राणा छतर सिंह ने शासन किया जिसे मराठा राजा महाड़ सिंह शिंदे ने हराकर किले पर नियंत्र प्राप्त कर लिया था। मराठा राजा से किले को इस्ट इंडिया कंपनी ने छीन लिया था उन्होंने 3 अगस्त 1780 को छापामार युद्ध कर किले पर कब्जा हासिल किया था। 1780 में लॉर्ड वारन हेस्टिंग ने गोहद राणा को किले के अधिकार वापिस दिलाए थे जिसे वह मराठाओं से 4 साल बाद फिर हार गए थे।

1808-1844 तक किला कभी मराठा तो कभी अंग्रेजौं के नियंत्रण में रहा। मराठा सिंदिया वंश को दीवान के रूप में नियुक्त कर अंग्रेजो ने 1844 में किला उन्हें सौंप दिया था। 1858 में अंग्रेजों ने किले को अपने अधीन ले लिया था और उसके बाद जब 1886 में उन्होंने पूरे भारत पर कब्जा तर लिया था तब किले को सिंधिया घराने को दे दिया था। सिंधिया घराने ने भारत के आजाद होने यानि कि 1947 तक किले पर राज किया।

ग्वालियर किले की वस्तु कला- Architecture Information about Gwalior Fort in Hindi

ग्वालियर का किला लाल बलुआ पत्थरो और सूर्खी चुने से बना हुआ मैदानी क्षेत्र से 100 मीटर की ऊँचाई पर है और 3 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी बाहरी दिवार 2 मील लंबी है और चौड़ाई 1 किलोमीटर से 200 मीटर तक है। ग्वालियर किला ग्वालियर की हर दिशा से दिखाई देता है और इसके दो द्वार है। ग्वालियर द्वार पैदल जाने का रास्ता है और उरवाई रास्ता गाड़ियोम के लिए है। सड़को के पास पड़े चट्टानों के उपर जैन तीर्थंकारो की विशाल मूर्तियाँ बड़ी बारीकी से उकेरी गई है। यहाँ पर एक गुजरी महल भी है जो रानी मृगनयनी के लिए बनवाया गया था। यह राजा मान सिंह और रानी मृग्नयनी के प्रेम का प्रतीक है। महल के उतर पश्चिम में मन मंदिर है जहाँ तक जाने वाली सीढ़ियों पर शून्य उकेरा गया है जो कि 1500 साल पुराना है और शुन्य की उपस्थिति को दर्शाता है। इसमें जहाँगीर, शहाँजहाँ जैसे बहुत से महल है।

Gwalior Fort Information and Facts in Hindi | ग्वालियर के किले से जुड़े रोचक तथ्य

  1. ग्वालियर के किले को हिंद के किलों का मोती भी कहा जाता है।
  2. ग्वालियर के किले के परिसर में एक तामचीनी वृक्ष भी है जिसे महान संगीतकार तानसेन ने लगाया था।
  3. कोहिनुर हीरे के आखिरी सरंक्षक ग्वालियर के ही राजा थे।

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