हरियाणा पर निबंध

हरियाणा पर निबंध- Essay on Haryana in Hindi

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हरियाणा पर निबंध- Essay on Haryana in Hindi

देस मा देस हरियाणा,

यहां दूध दही का खाणा।

व्यक्ति समाज की इकाई है। वह परिवार, ग्राम अथवा नगर तथा प्रान्त और राष्ट्र के निर्माण की भी इकाई बनता है। किसी भी देश का अस्तित्व अनेक ग्रामों और नगरों के सामूहिक रूप से बनता है। हमारे राष्ट्र के निर्माण में भी इसी प्रकार अनेक प्रान्त मिलते हैं। राष्ट्र अथवा देश की प्रगति और विकास इन प्रदेशों अथवा राज्यों या प्रान्त की प्रगति से आँका जा सकता है। राज्य विशेष अपना अलग रूप लेते हुए भी सर्वथा अलग नहीं होते हैं अपितु उनकी सार्थकता राष्ट्र के साथ ही होती है। हरियाणा भी हमारे राष्ट्र का एक महत्त्वपूर्ण प्रान्त है जिसकी अपनी विशेष संस्कृति और पहचान है।

भौगोलिक एवं ऐतिहासिक स्थिति-पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार सरस्वती और दृषद्वती नदियों के बीच के भू-भाग को देव-निर्मित ‘ब्रह्मावर्त’ कहा जाता है जिसे आज हरियाणा के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल इसे नकुल-दिग्विजय के सन्दर्भ में ‘बहुधान्यक’ नाम दिया गया क्योंकि यह भू भाग हरा-भरा और अन्न से परिपूर्ण था। मनुस्मृति में भी इसे हरियाणा नाम दिया गया है।

इस प्रदेश का उल्लेख मुसलमान सुल्तान मुहम्मद बिन के समय के एक शिलालेख में भी हुआ है। तेरहवीं शताब्दी का है। आरम्भ में इसे ‘हरियान’ नाम से पुकारा जाता था। हरियाणा शब्द के अर्थ और उत्पत्ति के संबंध में अनेक विचार हैं। कुछ विद्वानों का विचार है कि हरे भरे घने जंगलों के कारण इसे हरि अरण्य कहा जाता था जो बिगड़ कर हरियाणा बन गया। अन्य लोगों की धारणा है कि यहाँ हरिया वन था जो एक प्रदेश बनने के कारण हरियाणा कहलाया। एक मत यह भी है कि यहाँ हरि (श्री कृष्ण) का आना हुआ अतः यह हरियाणा कहलाया।

हरियाणा प्रान्त के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा दिल्ली की सीमाएँ हैं। यह प्रदेश पहली नवम्बर सन् 1966 को एक स्वतंत्र प्रदेश बना। इससे पूर्व यह पंजाब का ही एक भाग था। आर्य सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक हरियाणा प्रान्त के कुरुक्षेत्र को धर्म क्षेत्र कहा जाता है। जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था तथा श्री कृष्ण के मुखारविन्द से गीतामृत की वर्षा हुई थी।

जब भारत पर विदेशी आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिम की ओर से आए तो इस प्रान्त को भी शत्रुओं को मुँह तोड़ जवाब देना पड़ा। हूण, कुषाण आदि जातियों को यहाँ से खदेड़ा गया। थानेसर को भारत के अंतिम सम्राट हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी बनाया था। सन् 1857 की क्रान्ति के समय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में यहां के वीर लोगों ने अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ाए थे। इससे कुपित होकर अंग्रेजी सरकार ने इसे अनेक छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया।

भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन से हरियाणा का आकार छोटा हो गया। इस प्रान्त के प्रमुख ज़िले हैं- अम्बाला, रोहतक, करनाल, हिसार गुड़गाँव, कुरुक्षेत्र, महेन्द्रगढ़ तथा जींद।

हरियाणा प्रदेश भी पंजाब की तरह ही कृषि प्रधान प्रदेश है। यह प्रदेश गाँवों का प्रदेश है जिसमें भारत की आत्मा बसती है। यहाँ अधिकतर जाट, गूजर, अहीर तथा राजपूत जातियाँ बसती हैं। जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि और पशु-पालन है।

हरियाणा का सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन- पौराणिक काल से ही हरियाणा की धरती वीरों की जननी रही हैं। महाभारत के युद्ध के महान् योद्धा द्रोण, भीष्म, भीम, अर्जुन, दुर्योधन, जरासंध जैसे अनेक वीरों की यह जन्मभूमि है। हरियाणा की प्रान्तीय सभ्यता के चिन्ह प्राचीन सभ्यता के अवशेषों में अपना विशेष महत्त्व रखते हैं। यहाँ के वीरवर तुलाराम की सिंह गर्जना से अंग्रेज़ों के दिल दहल उठते थे। मुगल सम्राट अकबर को नाको चने चबवाने वाले वीर हेमू का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है जिसने दिल्ली पर आर्य पताका फहराई थी।

पानीपत की लड़ाई इतिहास प्रसिद्ध लड़ाई रही है। भारत पाक यद के समय यहाँ के वीर सैनिकों ने शत्रु को परास्त किया वीर चक्र तथा महावीर चक्र प्राप्त किये जो वीरता के लिए विशिष्ट पदक माने जाते हैं। इसी प्रकार हरियाणा पुलिस के वीर कर्मचारियों ने राष्ट्रपति पुलिस पदक तथा राष्ट्रपति जीवन रक्षा पदक प्राप्त कर हरियाणा को विशेष गौरव दिलवाया।

कृषि प्रधान प्रान्त हरियाणा के लोग निरन्तर श्रम की पूजा में ही विश्वास रखते हैं। अन्न की उपज में आज हरियाणा भारत में अपना प्रमुख स्थान रखता है। यहाँ के ग्रामीण लोग सरल-सीधे और ईश्वर में आस्था वाले लोग होते हैं। यहाँ के सामाजिक जीवन में एक विशेष प्रथा कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जाती है कि पति की मृत्यु होने के बाद स्त्री का उसके देवर के साथ विवाह कर दिया जाता है। यह प्रथा विधवा स्त्री को समाज के अत्याचारों से बचाती है और स्त्री सम्मानपूर्वक जीवन जीती है। पंचायती राज-व्यवस्था के द्वारा लोग अपने झगड़े आपस में ही निपटा लेते हैं।

हरियाणा की संस्कृति में प्राचीन रीति-रिवाज़, त्योहार और पर्व, तीज, शकुन और अपशकुन घुले-मिले हैं। मेलों में तो हरियाणा की संस्कृति छलक उठती है। कुरुक्षेत्र का कुम्भ का मेला जो सूर्य ग्रहण के अवसर पर लगता है विशेष रूप से उल्लेखनीय है। होली, दीपावली, जन्माष्टमी, दशहरा, धुलेंडी, तीज आदि त्यौहार तो बहुत ही उत्साह और उमंग से मनाए जाते हैं। सोमवती अमावस्या का मेला नारनौल में लगता है। हरियाणा के लोकगीत और लोकनृत्य तो अपना विशेष आकर्षण रखते हैं। युवक और युवतियाँ स्वस्थ, सुन्दर और परिश्रमी होते हैं।

ग्रामीण लोगों की अपनी विशेष वेशभूषा होती है जो आज के युग में भी अपनी प्राचीन सभ्यता को जीवित रखती है। धार्मिक महत्त्व के दर्शनीय स्थलों में कुरुक्षेत्र का तालाब, संजय तालाब तथा अभिमन्युपुर प्रसिद्ध हैं। यहाँ के दर्शनीय स्थलों में हिसार के टीले, पानीपत में कवाली बाग तथा हुमायूं का चबूतरा, करनाल का गुरुद्वारा मंजी साहब, सोहना के गर्म पानी के चश्मे, अम्बाला का प्राकृतिक सौंदर्य, शिवालिक पर्वत श्रृंखलाएं विशेष उल्लेखनीय हैं।

हरियाणा : विकास की ओर-जब से हरियाणा पूर्ण स्वायत्त हुआ है तब से इस प्रान्त ने सर्वतोमुखी उन्नति की है। यहाँ यातायात के साधनों का विकास हुआ और सुन्दर सड़कें बनवाई गयी हैं। सारे गाँवों को अब नगरों से जोड़ दिया गया है। परिवहन के राष्ट्रीयकरण से सरकार को आर्थिक रूप से लाभ होता है। | विद्युत के प्रकाश से भी हरियाणा के गांव जगमगा उठते हैं। इससे उद्योग-धन्धों के विकास में भी सहायता होती है।

शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यहां कुरुक्षेत्र तथा रोहतक विश्वविद्यालय है जिनमें उच्च शिक्षा शोध कार्य मैडिकल एवं इन्जीनियरिंग की शिक्षा भी दी जाती है। हरियाणा हिन्दी भाषी प्रदेश है। इसके अलावा यहाँ हरियाणवी और जटवी बोलियाँ बोली जाती हैं। यहाँ सारे कार्य राजभाषा हिन्दी होने के कारण हिन्दी में ही किए जाते हैं। यह भूमि तो पुष्पदन्त, सूरदास, मुनि हेम विजय, चौरंगीनाथ, सन्त गरीबदास, भाई सन्तोख सिंह, जैसे प्रसिद्ध कवियों की जन्म भूमि है।

उद्योग-धन्धों के क्षेत्र में भी हरियाणा प्रगति के पथ पर बढ़ता जा रहा है। फरीदाबाद आज भारत के विशिष्ट औद्योगिक नगरों में से है। इनके अलावा जगाधरी, सोनीपत, नीलोखेड़ी, अम्बाला, गुड़गांव, नारनौल तथा हिसार भी प्रमुख औद्योगिक नगरों में हैं। यहाँ के प्रमुख उद्योगों में कागज उद्योग, स्लेट और चीनी मिट्टी के उद्योग घरेलू उपयोगी के सामान का उद्योग, कृषि से संबंधित अनेक उद्योग और कल कारखाने हैं।

अपना अलग अस्तित्व प्राप्त करने के बाद हरियाणा ने विशेष प्रगति की है। आज यहाँ की राजनीति देश की राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। कृषि उद्योग-धन्धों का विकास यहाँ तेजी से हो रहा तथा यातायात एवं विद्युत् की समुचित व्यवस्था है। जिस प्रदेश के लोग परिश्रमी होते हैं वह उन्नति तो करता ही है। आज हरियाणा अपनी प्राचीनता संस्कृति एवं इतिहास को समेटे हुए आधुनिक युग में भी प्रवेश कर रहा है अतः परिवर्तन को अपनाकर नवीनता को आत्मसात कर रहा है।

# History of Haryana in Hindi

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